"आरती श्री रामायण जी की" का विस्तृत अर्थ (प्रत्येक पंक्ति का भावार्थ)
1️⃣ आरती श्री रामायण जी की । कीरति कलित ललित सिय पी की ॥
अर्थ: यह श्रीरामायण की आरती है, जो श्रीराम और माता सीता की महिमा से परिपूर्ण है।
-
"कीरति कलित" – रामायण कीर्ति (यश) से भरी हुई है।
-
"ललित सिय पी की" – यह सुंदर और स्नेहमयी माता सीता और श्रीराम की कथा कहती है।
2️⃣ गावत ब्रह्मादिक मुनि नारद । बाल्मीकि बिग्यान बिसारद ॥
अर्थ: ब्रह्मा, नारद और महर्षि वाल्मीकि जैसे महान ज्ञानी रामायण की स्तुति गाते हैं।
-
"ब्रह्मादिक" – ब्रह्मा, विष्णु, महेश और अन्य देवता।
-
"मुनि नारद" – देवर्षि नारद, जो हर युग में भक्ति का प्रचार करते हैं।
-
"बाल्मीकि बिग्यान बिसारद" – महर्षि वाल्मीकि, जिन्होंने रामायण लिखी और ज्ञान के सागर हैं।
3️⃣ शुक सनकादिक शेष अरु शारद । बरनि पवनसुत कीरति नीकी ॥
अर्थ: शुकदेव, सनक-सनंदन ऋषि, शेषनाग और देवी सरस्वती भी रामायण की महिमा गाते हैं।
-
"शुक" – श्रीमद्भागवत के ज्ञाता महर्षि शुकदेव।
-
"सनकादिक" – सनक, सनंदन, सनातन और सनत कुमार, जो सनातन ज्ञान के प्रवर्तक हैं।
-
"शेष" – शेषनाग, जो अनंत ज्ञान के प्रतीक हैं।
-
"शारद" – देवी सरस्वती, जो विद्या की देवी हैं।
-
"पवनसुत" – हनुमानजी, जो श्रीराम के अनन्य भक्त हैं और उनकी कीर्ति का बखान करते हैं।
4️⃣ गावत वेद पुरान अष्टदस । छओं शास्त्र सब ग्रंथन को रस ॥
अर्थ: अठारह पुराण, चार वेद और छह शास्त्र सभी श्रीरामायण की महिमा गाते हैं।
-
"वेद" – ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद।
-
"पुरान अष्टदस" – अठारह पुराण (जैसे विष्णु पुराण, शिव पुराण, भागवत पुराण आदि)।
-
"छओं शास्त्र" – षड्दर्शन (न्याय, वैशेषिक, सांख्य, योग, मीमांसा, वेदांत)।
-
"सब ग्रंथन को रस" – सभी धार्मिक ग्रंथों का सार रामायण में समाया हुआ है।
5️⃣ मुनि जन धन संतान को सरबस । सार अंश सम्मत सब ही की ॥
अर्थ: ऋषि-मुनि, संत, ज्ञानी, धनवान और परिवार वाले सभी रामायण को सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ मानते हैं।
-
"मुनि जन" – सभी ऋषि-मुनि इसकी महिमा गाते हैं।
-
"धन संतान को सरबस" – धनवान और परिवार के लोग भी इसे पढ़कर लाभ पाते हैं।
-
"सार अंश" – रामायण सभी शास्त्रों का सार है।
-
"सम्मत सब ही की" – इसे सभी ज्ञानी स्वीकार करते हैं।
6️⃣ गावत संतत शंभु भवानी । अरु घटसंभव मुनि बिग्यानी ॥
अर्थ: भगवान शिव और माता पार्वती भी श्रीरामायण का गुणगान करते हैं।
-
"संतत" – लगातार।
-
"शंभु भवानी" – शिवजी और पार्वती माता।
-
"घटसंभव मुनि बिग्यानी" – अग्नि के कुंड से उत्पन्न अगस्त्य मुनि जैसे महान ज्ञानी भी इसे पढ़ते हैं।
7️⃣ व्यास आदि कबिबर्ज बखानी । कागभुशुंडि गरुड़ के ही की ॥
अर्थ: महर्षि व्यास, कागभुशुंडी और गरुड़जी भी रामायण की महिमा का वर्णन करते हैं।
-
"व्यास" – महाभारत और वेदों के रचयिता महर्षि व्यास।
-
"आदि कबिबर्ज" – सभी प्रसिद्ध कवि (वाल्मीकि, तुलसीदास आदि)।
-
"कागभुशुंडी" – एक अमर संत, जिन्होंने गरुड़जी को रामकथा सुनाई थी।
-
"गरुड़" – भगवान विष्णु के वाहन, जो रामायण की कथा से मोक्ष प्राप्त करना चाहते थे।
8️⃣ कलिमल हरनि बिषय रस फीकी । सुभग सिंगार मुक्ति जुबती की ॥
अर्थ: रामायण कलियुग के पापों को नष्ट करने वाली है और सांसारिक विषयों को फीका बना देती है।
-
"कलिमल हरनि" – कलियुग के पापों का नाश करने वाली।
-
"बिषय रस फीकी" – सांसारिक भोग-विलास को तुच्छ बना देने वाली।
-
"सुभग सिंगार" – यह मोक्ष प्राप्ति के लिए सुंदर श्रृंगार के समान है।
-
"मुक्ति जुबती की" – जैसे एक सुंदर कन्या का श्रृंगार मोहक होता है, वैसे ही रामायण मोक्ष का आकर्षण है।
9️⃣ दलनि रोग भव मूरि अमी की । तात मातु सब बिधि तुलसी की ॥
अर्थ: श्रीरामायण सब रोगों का नाश करने वाली और मोक्ष प्रदान करने वाली अमृत के समान है।
-
"दलनि रोग" – शारीरिक और मानसिक रोगों को नष्ट करने वाली।
-
"भव मूरि अमी की" – जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति दिलाने वाली अमृत।
-
"तात मातु" – माता-पिता के समान हितकारी।
-
"सब बिधि तुलसी की" – तुलसीदासजी के अनुसार यह सभी प्रकार से लाभदायक है।
🔷 निष्कर्ष:
"आरती श्री रामायण जी की" श्रीरामचरितमानस (रामायण) की महिमा और प्रभाव को दर्शाने वाली एक अत्यंत पवित्र आरती है। यह हमें बताती है कि रामायण सभी शास्त्रों का सार है, जो कलियुग के पापों को मिटाने वाली और मोक्ष दिलाने वाली है। इसे देवता, ऋषि-मुनि, संत, शास्त्र, और स्वयं भगवान शिव-पार्वती भी गाते हैं।
🌿 रामायण केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को श्रेष्ठ बनाने का मार्ग है।
🙏 "सीता राम चरित अति पावन" 🙏